नौगांव ग्रामीण कला एवं तकनीकी संस्थान के यूएचवी लिविंग सेंटर में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में डॉ.श्याम कुमार IIT कानपुर से पीएचडी करने के बाद मध्यस्थ दर्शन के शिविर प्रबोधन में संलग्न है ,उन्होंने अपने प्रबोधन में स्वयं,परिवार, समाज और प्रकृति ,अस्तित्व समग्र के साथ समझ के आधार पर कैसे जिया जाए , इस विधि का प्रस्ताव रखा,आपने कहा कि जब हम स्वयं की आंतरिक यात्रा कर लेते हैं तो हमारा मानव मानव के साथ व्यवहार पक्ष एवं प्रकृति के साथ पूरकता का निर्वाह हो पाता है ,आपने परिवार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया की नौगांव में परिवारों ने अपने कार्य व्यवहार पर परिवार सहित कार्य करना प्रारंभ किया है जिससे उनमें आपसी संबंधों में आवश्यक सुधार भी हुआ है इन्हीं परिवारों को अपने पर और गहराई से कार्य करने की आवश्यकता है क्योंकि परिवार ही एक ऐसा स्थान है जहां से संबंधों का सुधार होता है इस शिविर में सहभागी रहे 40 परिवारों ने अपने पर और गहरे से कार्य करने तथा और परिवारों को जोड़ने में सहमति दिखाई साथ ही यूएचवी लिविंग केंद्र में नियमित शिविर आयोजित करने की मांग की गई जिसमें 7 दिवसीय शिविर का प्रस्ताव भी रखा गया, शिविर के संचालक भगवान सिंह परमार एवं अरुणा सिंह ने पूरी निष्ठा से शिविर का आवश्यक प्रबंधन तथा संसाधन लगाने का संकल्प दोहराया उन्होंने कहा कि जब से हम मानव मूल्यों को समझ रहे हैं तब से हमारे संबंधों में सुधार हुआ है कार्य करने की तरीकों में परिवर्तन आया है अब हम प्रत्येक कार्य सोच विचार कर प्रयोजन के अर्थ में करने लगे हैं। इस प्रस्ताव को समझने के बाद ही हम परिवार सहित संसाधन सहित जगह-जगह इस विधि को फैलाते रहेंगे तथा इसी जीवन शैली पर जीते रहेंगे और स्वयं जीते हुए दूसरे मनुष्यों के लिए प्रेरणा बनते रहेंगे दूसरे दिन इस विधि से जिन परिवारों में अमूल्य परिवर्तन हुआ है। उन परिवारों ने अपनी अपनी की बातें रखी जिसमें सर्वप्रथम करुणा सिंह द्वारा बताया गया कि उनके जीवन यात्रा में बहुत परिवर्तन हुआ है पहले दृष्टि बाहर रहती थी अब स्वयं पर कार्य चल रहा है लगता था कि अध्ययन पूरा हो गया है पर अब लगता है कि अध्ययन अब शुरू हुआ है अपनी जीवन यात्रा में हुए परिवर्तन को बताने के क्रम में श्री कमल अग्रवाल जी ने कहा अगर इस विधि से रूबरू ना होते तो बहुत कुछ छूट जाता अछूता रह जाता ,दशरथ प्रजापति ने कहा 6 वर्षों से कोर्ट में चल रही पारिवारिक कलह से परिवार सभा के माध्यम से उनका केस सुलझ गया है और अब परिवार सहित सुख शांति से रह रहे हैं ,गोवर्धन प्रजापति जी ने कहा की उनका क्रोध अब ध्यान में परिवर्तित हो रहा है मन की अशांति अब शांति में बदल रही है। प्रमोद कुशवाहा ने कहा पहले वह लालच में फंसा हुआ था प्रोजेक्ट में कार्य कर रहा था और इस ज्ञान को थोड़ा-थोड़ा सुन रहा था एक दिन उन्हें आभास हुआ की यह ज्ञान महत्वपूर्ण है तो उन्होंने इस विधि को पूरा समय देने का मन बना लिया। विश्वभान सिंह जी ने कहा मानव निर्माण का यह कार्य सर्वश्रेष्ठ है। चतुर्भुज अनुरागी जी ने कहा अब यह विद्या शिक्षा में समाहित हो चुकी है और अब मानवीय मूल्य में निश्चित ही नई ऊर्जा बच्चों में देखने को मिलेगी। अजय यादव ने कहा इस विद्या ने जैसे मेरे परिवार को नया जीवन दिया है ऐसे ही जिन परिवारों में परेशानियां है उन्हें भी इस विद्या का लाभ लेना चाहिए। शिवेंद्र निगम जी ने कहा इस विद्या से मेरा जुड़ाव कम था लेकिन अब वह निरंतर इससे जुड़ेंगे और लोगों को जोड़ेंगे। प्रमोद खरे जी ने कहा उन्हें इस विद्या को सुनने से आराम मिलता है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। श्रीमती अरुणा सिंह परमार,बलराम रैकवार,इंद्रपाल सिंह यादव ,विक्रम सिंह यादव,आसाराम विश्वकर्मा और भी अतिथि जो दो दिवसीय शिविर में शामिल हुए उन्होंने अपने-अपने विचार रखे। समाधान केंद्रित पत्रकार अजय यादव ने कहा कि सात दिवसीय शिविर जब आयोजित होगा तो इस बात की सूचना सभी को दी जाएगी ताकि वह भी मानव मूल्यों को समझकर अपने जीवन को एक नया आयाम दे सके।








