नौगांव, 23 जुलाई (राज की दुनिया)। क्या आप जानते हैं कि आप जो पानी पी रहे हैं वह कितना शुद्ध है। शायद नहीं जिसका कारण भी बेहद चिंताजनक है। नौगांव नगर पालिका जिले भर से ही नहीं बल्कि प्रदेशभर की सभी नगर पालिकाओं में सबसे ज़्यादा जलकर वसूलने के बावजूद लोगों को बिना जांचा-परखा पानी सप्लाई कर रही है। मगर अफ़सोस की बात है कि जिस फिल्टर प्लांट से हजारों घरों में पानी पहुंच रहा है। वहां पर पानी की गुणवत्ता जांचने वाला कोई तकनीशियन ही तैनात नहीं है। जबकि फिल्टर प्लांट में एक मॉडर्न लैब मौजूद है जो मशीनों और केमिकल से सुसज्जित है।
लैब पिछले कुछ सालों से शोपीस बनी धूल खा रही है। पानी को शुद्ध करने के लिए कितनी मात्रा में फिटकरी, क्लोरीन या अन्य केमिकल डालना है, इसका कोई मानक पालन नहीं किया जा रहा। बल्कि नपा के सामान्य कर्मचारी अपने अंदाज से फिटकरी और ब्लीचिंग मिला रहे हैं।
सालों से नहीं हुई लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति
शहर की बढ़ती आबादी एवं लोगों की प्यास बुझाने के लिए वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के तहत 36 करोड़ की राशि से धसान नदी के किनारे स्थित गर्रोली गांव में अत्याधुनिक फिल्टर प्लांट का निर्माण कराया गया था। उस समय बड़े-बड़े दावे वादे किए गए थे कि यहां से शुद्ध, फिल्टर और जांचा हुआ पानी ही लोगों तक पहुंचेगा। इसके लिए लैब, केमिकल स्टोर और टेक्नीशियन की व्यवस्था की गई थी। शुरुआत में सब ठीक चला, लेकिन अब आलम यह है कि लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति सालों से नहीं हुई। नपा कर्मचारी ही केमिकल मिलाकर पानी सप्लाई कर रहे हैं। बिना किसी टेस्ट के जो लोगों की सेहत पर दुष्प्रभाव डाल सकता है। सूत्र बताते है कि भले ही फ़िल्टर प्लांट की लैब में टेक्नीशियन तैनात न हो लेकिन कागज़ी प्रकिया में सब कुछ चल रहा है।
पीएचई के मुताबिक पानी की होना चाहिए जांच
पीएचई के अधिकारियों के अनुसार पानी की शुद्धता जांचने के लिए कम से कम 12 टेस्ट जरूरी होते हैं। इसमें पीएच, हार्डनेस, टीडीएस, क्लोरिन, आयरन, फ्लोराइड, बैक्टीरिया, कॉन्टेक्टिविटी, कलर, ऑडर टेस्ट, गंध आदि की जांच होना जरूरी है। बारिश के मौसम में हर माह दो बार जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। लेकिन नपा ने न कभी इन टेस्टों की जांच कराई न ही कभी पीएचई लैब से कोई अधिकृत टेस्ट कराया। हालांकि बारिश के शुरुआती दिनों में एक सप्ताह तक नलों से आ रहे गंदे पानी को देख मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा प्लांट की सफाई करवाई गई। लेकिन यह मूल समस्या का समाधान नहीं रेगुलर पानी की जांच होनी चाहिए ताकि शहर वासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सके।
वसूली में नंबर 1, जवाबदेही में फिसड्डी
नपा द्वारा हर माह 163 रुपए जलकर वसूल रही है। शहर में क़रीब 1 लाख से अधिक की आबादी है और हजारों घरों में फ़िल्टर प्लांट का पानी सप्लाई हो रहा है। लेकिन यह पानी किस गुणवत्ता का है, इसकी कोई जांच ही नहीं हो रही है। एक ओर जहां नपा सबसे अधिक जलकर वसूल रही है ऊपर से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी ज़िम्मेदार आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, वार्ड पार्षदों को न हो लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
इनका कहना है
बारिश के इन दिनों जलस्रोतों में गंदगी और बैक्टीरिया का संक्रमण आम हो जाता है। जिस कारण उल्टी-दस्त, पीलिया, खूनी पेचिश, पेट दर्द जैसी अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसलिए सावधानी बरतें शुद्ध साफ और उबले हुए पानी का सेवन करें साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें।
-डॉ नितेश गुप्ता मेडिकल ऑफिसर नौगांव
अभी कुछ दिन पहले फ़िल्टर प्लांट की साफ सफाई कराई थी। हमारी बात हो गई लैब में टेक्नीशियन की भी तैनाती कराई जाएगी। जल्द ही बोतलों में भरकर नलों में आ रहे पानी की जांच छतरपुर में कराई जाएगी।
-आरएस अवस्थी सीएमओ नपा नौगांव









