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जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की टाइमिंग ने चौंकाया 

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नई दिल्ली। जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद देश में राजनीति गरमाई हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा, लेकिन कांग्रेस आरोप लगा रही है कि परदे के पीछे कुछ और किस्सा चल रहा है। मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार 21 जुलाई को विपक्ष जस्टिस वर्मा को हटाने के खिलाफ प्रस्ताव लाया था। ये कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके इस्तीफे का कारण भी यह मुद्दा हो सकता है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद, अब देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव होने वाला है, जो कई मायनों में अहम है। इस चुनाव में संख्याबल के लिहाज से सत्तारूढ़ एनडीए स्पष्ट बढ़त पर है। संसद के दोनों सदनों में एनडीए को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है, जो उपराष्ट्रपति चुनाव में एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के वोट इसका निर्धारण करते हैं। तो ऐसे में उपराष्ट्रपति एनडीए से ही हो सकता है। कई नामों को लेकर अटकलबाजी जारी है।
इस्तीफा देकर धनखड़ ने चौंकाया
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। इसकी टाइमिंग भी चौंकाने वाली है क्योंकि संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया और इसके पीछे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कहा कि इसीलिए मैंने इस्तीफा दिया है। धनखड़ के इस्तीफे के पीछे की वजहों को देखें तो ऐसा लगता है कि सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन जो घटनाएं घटी, वह धनखड़ के इस्तीफे का कारण हो सकती हैं। दूसरा ये भी हो सकता है कि धनखड़ के लगातार न्यायपालिका के खिलाफ तीखे बयानों से सरकार असहज हो गई थी और इस वजह से भी वो दबाव में रहे हों। तीसरा ये कि उनके बयानों को अक्सर सरकार का रुख माना जाता था, जिससे सरकार आलोचना के घेरे में आ जाती थी। लेकिन ये सच और संभव भी है कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के पीछे वास्तव में उनकी हेल्थ प्रॉब्लेम्स हों। एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को एक कॉल आया था, जिसके बाद झगड़ा शुरू हो गया।  उस फोन के बाद जगदीप धनखड़ के पास इस्तीफा देने का ही विकल्प बच गया था। मानसून सत्र के दौरान उन्होंने जस्टिस वर्मा को हटाने वाले प्रस्ताव एक्शन लेते हुए विपक्ष के नोटिस का स्वीकार किया और सदन के महासचिव को जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।

रिपोर्ट के अनुसार पूर्व उपराष्ट्रपति के इस कदम से केंद्र नाराज हो गया। फोन पर जब जगदीप धनखड़ से इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी और फिर तेज बहस होने लगी। इतना ही नहीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बातचीत के बाद जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर भी चर्चाएं होने लगी। जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद, वे तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले। संविधान के अनुच्छेद 68(2) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने के कारण उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही संपन्न हो जाता है। यदि मृत्यु, त्यागपत्र, निष्कासन या अन्य किसी कारण से कोई रिक्ति उत्पन्न होती है, तो उस रिक्ति को भरने के लिए चुनाव घटना के तुरंत बाद किया जाता है। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का पालन करता है, जिसमें गुप्त मतदान होता है। दोनों सदनों के सदस्य उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रैंक करते हैं।

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