ललिता यादव विधानसभा की महिला एवं बाल कल्याण समिति की सभापति नियुक्त
छतरपुर। मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने वर्ष 2026-27 एवं 2026-28 की अवधि में सेवा करने के लिए सदन समितियों का गठन किया है। गठन के क्रम में महिला एवं बाल कल्याण समिति (वर्ष 2026-28 तक के लिए) का गठन कर सभापति नियुक्त करते हुए समिति सदस्यों को नाम निर्दिष्ट किया गया है।
विधानसभा के अवर सचिव नरेंद्र मिश्रा के अनुसार महिला एवं बाल कल्याण समिति का सभापति छतरपुर विधायक श्रीमती ललिता यादव को नियुक्त किया गया है। विधायकगण श्रीमती उमादेवी खटीक, सुश्री मंजू राजेन्द्र दादू, श्रीमती गंगा सज्जनसिंह उइके, श्रीमती सरला विजेन्द्र रावत, श्रीमती प्रियंका पैंची, श्रीमती कंचन मुकेश तनवे, श्रीमती छाया मोरे, बड़ामलहरा विधायक सुश्री रामसिया भारती, श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर एवं श्रीमती सेना महेश पटेल को सदस्य नाम निर्दिष्ट किया गया है।
महिला और बाल कल्याण समिति महिलाओं और बच्चों के उत्थान, सुरक्षा, स्वास्थ्य (पोषण), शिक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने, उनके कार्यान्वयन की समीक्षा करने और बजट प्रावधानों की निगरानी करने का काम करती है। यह समिति विधानसभा को अपनी रिपोर्ट सौंपती है और महिला सशक्तिकरण व बाल संरक्षण संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन को सशक्त बनाने हेतु अनुशंसाएं करती है।
समिति के प्रमुख कार्य:
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं (जैसे पोषण अभियान, पीएम मातृ वंदना योजना) के कार्य की समीक्षा करना। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने, बाल विवाह रोकने और कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना। बच्चों (विशेषकर जरूरतमंदों) के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और पुनर्वास सुनिश्चित करना। कुपोषण उन्मूलन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए बजट के उचित उपयोग की निगरानी करना। विभाग की प्रशासनिक रिपोर्ट और योजनाओं की प्रगति का अध्ययन कर विधानसभा को रिपोर्ट करना।
समिति की शक्तियाँ:
यह समिति विभागीय कार्यों में अनियमितता या शिकायतों की जांच कर सकती है। बजट के प्रावधानों और नीति निर्माण में फेरबदल की सिफारिश कर सकती है। बाल देखभाल संस्थाओं और संबंधित केंद्रों का निरीक्षण कर सकती है। सीडब्ल्यूसी जिला स्तर पर यह एक न्यायिक पीठ के रूप में कार्य करती है। इसके पास प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां होती हैं। यह जरूरतमंद बच्चों की देखरेख, संरक्षण और पुनर्वास का अंतिम आदेश देने में सक्षम है।










