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जिंदगी बचाने का जुनून! एक कॉल पर सारे काम छोड़ पहुंचते हैं B नेगेटिव ब्लड वाले पत्रकार पप्पू गुप्ता

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छतरपुर के रक्तवीर पत्रकार पप्पू गुप्ता दुर्लभ B नेगेटिव ब्लड देकर अब तक 111 लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं.

छतरपुर : कहते हैं रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं. जब किसी श्रेणी का ब्लड बहुत कम पाया जाता है तो ये और भी बड़ा दान महापुण्य बन जाता है. छतरपुर में कई ऐसे समाजसेवी हैं, जिन्होंने रक्तदान से लोगों को नई जिंदगी दी. ऐसे ही पत्रकार हैं पप्पू गुप्ता. वह अब तक 111 बार दुर्लभ B नेगेटिव ब्लड रक्तदान कर चुके हैं. जुनून ऐसा है कि उन्हें कहीं से भी एक कॉल आ जाए तो सारे काम छोड़कर पहुंच जाते हैं जरूरतमंद को ब्लड देने.

बीते 30 साल से कर रहे रक्तदान ओर उम्र 53

छतरपुर के टौरिया मोहल्ले में रहने वाले पत्रकार पप्पू गुप्ता का ब्लड ग्रुप B नेगेटिव है, जो दुनिया में दुर्लभ माना जाता है. पूरी आबादी में 2 प्रतिशत ही ये ब्लड मिलता है. पत्रकार पप्पू गुप्ता कहते हैं ” वह पिछले 30 साल से रक्तदान कर रहे हैं कभी कभी तो 3 माह पूरे नहीं हो पाते ओर ब्लड देना पड़ जाता है।. पप्पू गुप्ता ने बताया कि हमारे घर में हमारी अम्मा के साथ ही हम तीन भाई इस ग्रुप के हे ओर तीनों भाई हमेशा तैयार रहते हे देने को ब्लड ।
किसी को भी रक्त की जरूरत पड़ेगी तो तत्काल पहुंचूंगा. वह अब तक 111 बार रक्तदान कर चुके हैं.”

कई शहरों में जाकर बचाई लोगों की जान रक्तवीर पप्पू गुप्ता बताते हैं जिला “हॉस्पिटल सहित सभी जगह मेरा नम्बर लिखा हुआ है. सोशल मीडिया कहूं. छतरपुर जिले से बाहर भी रक्तदान कर चुके हैं. दिल्ली, झांसी, टीकमगढ़, साग़रहुंचता हूं. छतरपुर जिले से बाहर भी रक्तदान कर चुके हैं. दिल्ली, झांसी, टीकमगढ़, साग़र सहित कई जिले में रक्तबाजपेई के वर्ष 2004 में ललितपुर सिंगरौली रेल लाईन के शिलान्यास पर प्रशासन की ओर से बीबहुत कम लोगों में होता है. जिसको भी जरूरत पड़ती दौड़ कर जाता हूं. जब तक जीवित रहूंगा, रक्तदान करूंगा.”

जन्मदिन पर भी दान करते हैं रक्तदान। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेनडोनर्सोदी जी के जन्म दिन के साथ ही खजुराहो में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई के वर्ष 2004 में ललितपुर सिंगरौली रेल लाईन के शिलान्यास पर प्रशासन की ओर से बी नेगेटिव ब्लड एकत्रित किया गया था इसके साथ ही उमा भारती जी के जन्मदिन पर आयोजित छत्रसाल चौक पर बल्ड से तुलादान में भी मौका मिला था ।

रक्तवीर पप्पू गुप्ता कहते हैं “जरूरत पड़ने पर ही नहीं बल्कि फेस्टिवल या जन्मदिन पर भी मैं रक्तदान करने जाता हूं, ताकि हॉस्पिटल में मेरे ग्रुप का ब्लड मौजूद रहे. घर वाले भी काफी टोकते थे कि इतना रक्तदान क्यों कर रहे हो, लेकिन बाद में घर वाले भी समझ गए कि अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिए अब हौसला बढाते हैं.” हमारा भाई जी न्यूज के संवाददाता हरीश गुप्ता के साथ ही सबसे छोटा भाई प्रदीप गुप्ता भी भोपाल से ब्लड देने आ जाता है ।

छतरपुर के विख्यात चिकित्सक डॉ अरविंद सिंह कहते हैं “बी नेगेटिव ब्लड ग्रुप का दुनिया में बहुत कम प्रतिशत होता है. कुल आबादी के लगभग 2% लोग ही इस दुर्लभ रक्त समूह के होते हैं.। इसलिए इसे एक रेयर ब्लड ग्रुप माना जाता है. आपातकालीन स्थिति में इसके डोनर्स को खोजना कठिन होता.”

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