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माँ धधागिरी मंदिर परिसर मे बने सरोवर मे डूबने से 18 साल के युवक की मौत

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20 घंटे बीतने पर नहीं मिला मृतक का शव, मृतक के पिता ने शासन/प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाये सवाल…

छतरपुर: बारीगढ़ थाना जुझार नगर क्षेत्र अंतर्गत, बारीगढ़ मे माँ धधागिरी मंदिर परिसर मे बने सरोवर मे प्रशांत अहिरवार उम्र 18 वर्ष की डूबने से मौत हो गईं। प्रशांत बीएससी का छात्र था, रक्षाबंधन के त्यौहार मे अपने घर आया था, वो सुबह दस बजे अपने दोस्त दिलीप सिंह के साथ मंदिर के सरोवर मे नहाने आया था, दोनों युवक तैरना नहीं जानते थे, पहले दोनों तालाब के घाट मे नहा रहे थे, प्रशांत का पैर घाट मे बनी काई मे फिसल गया जिससे वो गहराई क्षेत्र मे चला गया और डूबने से मौत हो गई।

हलाकि की अभी स्थानीय पुलिस टीम जुझार नगर और गौरिहार पुलिस आ गई हैं, एसडीआरएफ की टीम आई पर नाव में बैठकर जाल डालकर शव को ढूढ़ने का कार्य कर रही है। फिलहाल अभी तक शव को रेस्क्यू करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किये गए गये हैं।

एसडीआरएफ टीम को ज़ब नाव से जाल डालने में सफलता नहीं मिली तो केबिल के सहारे कैमरा भी पानी के अंदर डाला गया हैं, जिसमे अभी तक बॉडी नहीं दिखी है। सरोवर में अधिक मलवा होने के कारण बॉडी कचरे में भी समा सकती हैं जिसके डीकंपोज होने के बहुत कम चांस हैं। 20 घण्टे बीत जाने के बाद भी अब तक शव नहीं मिला और न ही रेस्कूयू टीम को सफलता मिली है।

यहां एसडीआरआफ की 6 सदस्यों की टीम रेस्क्यू करने तो आई, पर इस टीम मे गोताखोर पनडुब्बी का कोई सदस्य न होने के कारण पानी की गहराई में कोई भी सदस्य नहीं उतरा तो ऐसे में शव बरामद होने की संभावना कम है। गोता खोर पनडुब्बी के सदस्य ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद से, रेडियम से बने चश्मे लगाकर ज़ब गहराई मे उतरते हैं तो वो पानी गहराई तक भी पहुंच जाते हैं साथ मे रेडियम के चश्मे के मदद से उन्हें पानी मे ढूढ़ने मे अधिक परेशानी नहीं आती है।

बता दें कि सरोवर मे बड़ी छोटी मछली होने के कारण शव क्षत विक्षिप्त भी हो सकता है, इसलिए प्रशासन की यहां सबसे बड़ी भूल ये है कि- सरोवर को अधिक गहराई होने के बावजूद भी आखिर गोताखोर पनडुब्बी क्यों नहीं बुलाई गई जिससे पीड़ित परिवार को समय से शव मिल सके।

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