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4,850 करोड़ का लोन, 72 हैवी व्हीकल, सबसे भरोसेमंद दोस्त मालदीव को भारत से क्या-क्या मिला?

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ब्रिटेन से अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे देश की यात्रा पर पहुंचे जिसके साथ भारत के संबंध बीते कुछ वर्षों में बेहद संतोषजनक नहीं रहे हैं। साल 2023 में मालदीव में एक इंडिया आउट कैंपेन शुरू हुआ था। इसका मकसद भारत को मालदीव की आतंरिक राजनीति से बाहर रखना था। मोहम्मद मुइज्जूका रवैया चीन के प्रति सॉफ्ट और भारत के प्रति थोड़ा सख्त रहा। लेकिन पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान खुद रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट पर आना और फिर स्वतंत्रता दिवस का मेहमान बनाकर गार्ड ऑफ ऑनर दिलाना अपने आप में बहुत कुछ कहता है। प्रधानमंत्री का दो दिनों का मालदीव का दौरा है और वो तीसरी दफा माले की यात्रा पर हैं। वैसे मुइज्जू के कार्यकाल के दौरान किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की पहली यात्रा है। इसलिए दोनों देशों के लिए इस यात्रा के बेहद अहम मायने हैं। 

भारत ने प्रधानमंत्री की मालदीव यात्रा के दौरान नए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत मालदीव को 4,850 करोड़ की लोन सहायता प्रदान किया है। भारत सरकार ने मालदीव के रक्षा मंत्रालय को 72 भारी वाहन उपलब्ध कराए। राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘महासागर’ दृष्टिकोण में मालदीव का महत्वपूर्ण स्थान है और भारत को मालदीव का सबसे भरोसेमंद दोस्त होने पर भी गर्व है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव द्विपक्षीय निवेश संधि को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि हमने मालदीव को 56.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कहा कि भारत मालदीव को उसकी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने में हमेशा सहयोग देगा। 

प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले सभी भारत वासियों की ओर से मैं राष्ट्रपति और मालदीव के लोगों को स्वतंत्रता के 60 वर्षों की ऐतिहासिक वर्षगांठ पर हार्दिक शुभखामनाएं देता हूं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए मैं राष्ट्रपति का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस साल भारत और मालदीव अपने राजनयिक संबंधों की भी 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हमारी संबंधों की जड़ें इतिहास से भी पुरानी है… आज जारी किया गया डाक टिकट दर्शाता है कि हम केवल पड़ोसी नहीं हैं, सहयात्री भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग आपसी विश्वास का परिचायक है। रक्षा मंत्रालय की बिल्डिंग जिसका आज उद्घाटन किया जा रहा है इस विश्वास की मजबूत इमारत है, हमारी मजबूत साझेदारी का प्रतीक है… हमारी साझेदारी अब मौसम विज्ञान में भी होगी। मौसम चाहे जैसा हो हमारी मित्रता सदैव उज्ज्वल और स्पष्ट रहेगी…हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि हमारा साझा लक्ष्य है। हमारी आर्थिक साझेदारी को गति देने के लिए हमने कई कदम उठाए हैं। आपसी निवेश को गति देने के लिए हम शीघ्र ही द्विपक्षीय निवेश संधि को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे, मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत शुरू हो गई है। 

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