नौगांव, 25 जुलाई (राज की दुनिया)। जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार का एक सुनियोजित खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गड़बड़ी को उजागर होने से बचाने के लिए पंचायत सचिवों और जिम्मेदारों ने बिलों को ही बिलर कर दस्तावेज़ों में शामिल कर लिया है। यानी किस काम पर कितना पैसा खर्च हुआ, किसके नाम का बिल लगा, कितनी राशि निकाली गई, इसका कोई ठोस रिकॉर्ड नजर नहीं आता। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी ज़िम्मेदार आधिकारियों को न हो इसके बाद भी इस फर्जीवाड़े की न तो कोई जांच होती न पड़ताल जिस कारण पंचायतों के सचिव बेफिक्र होकर पंचायत दर्पण पर धुंधले बिल लगा रहे है। अगर ज़िम्मेदार अधिकारी जनपद क्षेत्र की 75 ग्राम पंचायतों में से किसी एक पंचायत की निष्पक्ष तरीके से पंचायत दर्पण में लगाए गए धुंधले और बिलर बिलों की जांच करेंगे तो हर पंचायत से लाखों रुपए का घोटाला उजागर हो सकता है। दैनिक राज की दुनिया हर एक पंचायत के धुंधले बिलों से की गई गड़बड़ी को उजागर करेगा।
बिलर बिलों से भ्रष्टाचार पर पर्दा
सूत्रों की मानें तो जनपद क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में लाखों के विकास कार्य किए जाने के दस्तावेज़ तो मौजूद हैं, लेकिन उन दस्तावेज़ों में बिल पूरी तरह से धुंधले (बिलर) कर दिए गए हैं, ताकि न तो जांच अधिकारी कुछ पढ़ सके और न ही आमजन समझ सके । इसका सीधा सा अर्थ है कागज पर काम ज़मीन पर शून्य। ग्रामीणों की ओर से समय-समय पर ज़िम्मेदार आधिकारियों से शिकायतें की गई लेकिन अधिकांश मामलों में फाइलें खोलकर जांच तक नहीं हुई। गड़बड़ी की पुष्टि होने के बावजूद कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति की गई।
जीएसटी नंबर अनिवार्य फिर भी पंचायतें लापरवाह
गौरतलब है कि पंचायत विभाग के आयुक्त ने लगभग दो साल पहले सभी पंचायतों को निर्देश जारी किया था कि जीएसटी नंबर अनिवार्य रूप से लिया जाए। लेकिन सूत्र बताते है कि आज तक कुछ पंचायतों ने जीएसटी नंबर ही नहीं लिया। जब तक जीएसटी नंबर और संबंधित सर्कुलर नंबर बिलों में दर्ज नहीं होंगे, तब तक वह कानूनी रूप से वैध नहीं माने जा सकते। ऐसे में बिना वैध दस्तावेज़ों के भुगतान किया जाना स्वयं में आर्थिक अनियमितता है।
पंचायत दर्पण पोर्टल पर दिखनी चाहिए पारदर्शिता
पंचायत दर्पण पोर्टल पर पंचायतों के कामकाज और भुगतान का पूरा लेखा-जोखा स्पष्ट दिखना चाहिए, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि ज्यादातर पंचायतों के सचिवों ने बिल अपलोड ही नहीं किए जिस कारण पंचायत दर्पण पर खुलते नहीं है और शो करने लगता है कि डाटा उपलब्ध नहीं है जिन्होंने पंचायत दर्पण पोर्टल पर बिल लगाए है वे धुंधले लगाने के कारण स्पष्ट दिखाई नहीं देते। पोर्टल पर अधूरे और नामहीन बिल अपलोड किए गए हैं जो दर्शाता है कि कहीं न कहीं मिलीभगत से यह खेल खेला गया है।
इनका कहना है
पंचायत दर्पण में लगाए गए बिल स्पष्ट दिखना चाहिए जिन पंचायतों में इस तरह की गड़बड़ी की जा रही है उनकी जांच कराएंगे अगर जांच में गलत पाया जाता है तो कार्यवाही की जाएगी ।
-प्रभाषराज घनघोरिया सीईओ जनपद नौगांव











