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राज की दुनिया का 24 वे वर्ष में प्रवेश…

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आमजन के हित सर्वोपरि

समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की सेवा करने के विभिन्न माध्यमों में पत्रकारिता भी एक है। शासन, प्रशासन और समाजसेवियों सबका लक्ष्य समान है कि समाज में असमानता, भेदभाव और किसी तरह की विसंगति न रहे। प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति सामाजिक समरसता की भावना के साथ विकास की दौड़ में सहभागी बनकर राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान दे। लक्ष्य सभी का एक ही है बस रास्ते अलग-अलग हैं, ठीक उसी तरह जैसे कोई ईश्वर को याद करता है तो कोई खुदा की इबादत करता है किसी का इष्ट ईसू हैं किंतु सभी हैं तो मोक्ष प्रदान करने की दिशा ही। गांधी जी भी कहते थे- ईश्वर अल्ला तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो पत्रकार भी इसी मंशा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन अल्प आय में कर रहे हैं।

सरकारों की ज्यादातर योजनाएं समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जातीं हैं किंतु ये योजनाएं अपने उद्देश्य को पूरा करते-करते भटक कर नहीं जानबूझकर सक्षम लोगों की जागीर बन जाती हैं और जरूरतमंद उम्मीद में टकटकी लगाए ताकते रह जाते हैं। अपने वाजिब हक़ की खातिर चक्कर लगाते लगाते उनकी चप्पलें घिस जातीं हैं। ऐसे में पत्रकारों का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे योजनाओं में हो रही अनियमितता को प्रकाश में लाकर उसके मकसद को अंजाम तक पहुंचाएं। और वे तमाम झंझावतों के बावजूद उन्हें अंजाम तक पहुंचाते भी हैं। यह जोखिम उठाते वक़्त कस्बाई और ग्रामीण अंचलों के पत्रकार गंभीर खतरे उठाते हैं। छुटपुट मारपीट तो सामान्य बात है पर कई बार माफिया, राजनेता और अधिकारी की आंख की किरकिरी बनकर उन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। पत्रकार इन सब खतरों से तब खेलते हैं जब उनके पास घर-परिवार को चलाने के लिए आवश्यक संसाधन तक मौजूद नहीं रहते। पत्रकारिता के जरिए समाजसेवा का ये जुनून वंचितों को लाभ दिलाता है फिर भी पत्रकारों के हितों की अनदेखी की जाती है।

सरकार प्रशासन की पूरी फ़ौज पर अरबों की राशि व्यय करने के बाद भी जो कार्य नहीं कर पाती वो काम बिना किसी आर्थिक हित के पत्रकार कर दिखाते आ रहे हैं। बावजूद इसके सरकार छोटे समाचार पत्रों के आर्थिक हितों से मुंह फेरे रहती है और पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने के विषय में गंभीरता नहीं दिखाती। सरकारों की लगातार उपेक्षा के बाद भी पत्रकार और लघु समाचार पत्र आमजनों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

इन सब विसंगतियों से सतत संघर्षरत आपका लोकप्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘राज की दुनिया’ आज 24 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। हम आज भी आमजन को सच्चाई और निष्पक्षता के साथ समाचार देने के अपने संकल्प को दोहरा रहे हैं। इस पर राहत इंदौरी का एक शेर सटीक बैठता है-

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गए, और हम थे कि सच ही सुनाते रहे।

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