दारुल-अमन है हमारा भारत

फिरोज बख्त अहमद
पिछले दिनों अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सरकार द्वारा मुस्लिमों के लिए उठाये गये कुछ कदम और योजनाओं के बारे में ‘माई गोव’ एप के अंतर्गत की गयी संगोष्ठी में बताया, तो आंखें खुलीं कि बड़ी खामोशी के साथ सरकार ने काफी काम कर दिया है।
पिछले साल अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं के लिए मुस्लिम छात्रों की मदद की थी। इनमें कई मुस्लिम लड़कियां भी थीं। इस बार इन परीक्षाओं का नतीजा आने पर पता चला कि आम तौर से दो-ढाई प्रतिशत पास होनेवालों के बजाय इस बार पांच प्रतिशत से ऊपर मुस्लिम छात्र उत्तीर्ण हुए। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि इन मलाईदार स्थानों पर लगभग 50 मुस्लिम प्रत्याशियों ने जगह बनायी।
बकौल नकवी बिना तुष्टीकरण के, सशक्तीकरण के द्वारा मोदी सरकार आज अल्पसंख्यकों को बराबरी का हिस्सेदार बना रही है। इसका प्रमाण यह है कि जहां 2014 से पूर्व लगभग पांच प्रतिशत मुस्लिम सरकारी नौकरियों में स्थान पाते थे, 2017 तक यह 10 प्रतिशत हो गया। इस बात का बखान उन्होंने अल्पसंख्यक मंत्रालय की फ्री कोचिंग प्राप्त कर सिविल सेवा में चयनित अभ्यर्थियों को सम्मानित किये जाने के समय बताया।
इसके अतिरिक्त यह मंत्रालय देश के विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिभावान युवाओं को सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, अन्य प्रशासनिक सेवाओं, बैंकिंग आदि के लिए बड़े पैमाने पर फ्री कोचिंग मुहैया करा रहा है, ताकि प्रतिभावान युवा इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकें।
आज के मुस्लिम तबके को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अब परिस्थितियां बदल गयी हैं और नया सिस्टम आया है। जिस प्रकार से कुरान और हदीस के अनुसार मुस्लिम अपना जीवन व्यतीत करते हैं, ठीक उसी प्रकार से संघ की भी अपनी विचारधारा हैं और जीवन व्यतीत करने की एक विशेष प्रणाली है, जिसका उसे ठीक इसी प्रकार से अधिकार है, जैसा कि मुस्लिमों को अपनी जीवनशैली द्वारा जिंदगी गुजारने का। कुरान में कहा गया है, ‘लकुम दीनोकुम वले यदीन’, अर्थात ‘तुम्हें तुम्हारा दीन मुबारक, हमें हमारा दीन मुबारक’। टकराव तब पैदा होता है, जब कुछ सांप्रदायिक मिजाज के लोग अपनी रोटियां सेंकने के लिए विभिन्न तबकों को आपस में लड़ाते हैं।
मुस्लिमों के लिए विशेषकर यह संदेश है कि भड़काने के लिए गेरुआ वस्त्रों में कुछ लोग हिंसा कर सकते हैं, उस पर उन्हें रिएक्ट करने की कोई आवश्यकता नहीं है, जैसा कि हरियाणा में खुले मैदान में नमाज पढ़ने पर लगभग हजार मुस्लिमों को कुछ लोगों ने उकसाने की कोशिश की। खुदा का शुक्र है कि नमाजी मुस्लिम उनकी बातों में न आकर, खामोशी से नमाज के बाद अपने-अपने रास्ते को चले गये।
पिछले सात दशकों में कांग्रेस ने भले ही मुस्लिमों को बतौर वोट बैंक इस्तेमाल किया हो, उर्दू सरकारी नौकरियों और अच्छे स्कूल कॉलेजों में उनके बच्चों की शिक्षा हेतु दाखिले न देकर प्रताड़ित, तुष्टीकरण किया हो, मगर इस सबके होते हुए उन्होंने बड़ी ही चतुराई के साथ संघ परिवार के विरुद्ध मुस्लिमों के मस्तिष्क में ऐसी दीवार खड़ी कर दी कि जिसको गिराना आसान नहीं। जैसे उन्होंने संघ के विरुद्ध मुसलमानों के दिमाग में जहर घोलकर, उनका उल्लू साधकर अपनी सत्ता का सुख भोगा है, उससे मुस्लिमों की अत्यंत हानि हुई है।
भारत लगभग सभी मुस्लिम देशों की तुलना में और विशेष रूप से पाकिस्तान की तुलना में एक बड़ा ही धर्मनिरपेक्ष और अमन-चैन वाला देश है।
यहां मुस्लिम प्रधानमंत्री तक को विरोध में कुछ भी कह देते हैं, मगर मजाल है कि उनके विरुद्ध कोई कुछ कहे। यही इसे देश की महानता है। इस्लामी विचारधारा के अनुसार, दो प्रकार के देश होते हैं- दारुल हरब (जहां गैर मुस्लिमों का राज हो) और दारुल इस्लाम (जहां मुस्लिमों का राज हो)।
अल्लाह भला करे कि भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद की रूह का, जिन्होंने कहा कि भारत न तो दारुल-हरब है और न ही दारुल-इस्लाम, बल्कि दारुल-अमन है। इसमें दो राय नहीं कि जिस अमन और शांति के साथ मुस्लिम भारत में गुजारा कर रहे हैं, ऐसा तो हमारे पड़ोस पाकिस्तान में भी नहीं है।
सच्ची बात तो यह है कि भारत में मुस्लिमों के साथ धर्म को लेकर किसी भी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया जाता। यदि किसी मुस्लिम को कोई सुविधा नहीं मिलती, तो वह इसलिए नहीं कि वह मुस्लिम है, बल्कि कोई ऐसी कमी रह गयी हो, इसलिए।
किसी दूसरे धर्म के सदस्य के साथ भी ऐसा हो सकता है। कुछ लोग ऐसा प्रचार कर रहे हैं कि आनेवाले 2019 के आम चुनावों में सत्ताधीन भाजपा किसी भी प्रकार से सत्ता में आने का यत्न करेगी, भले ही इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े। कुछ भी से अर्थ है, हिंदू-मुस्लिम दंगे अथवा पाकिस्तान पर हमला।
इस प्रकार का स्वांग रचानेवालों को पता होना चाहिए कि भले ही पिछली सरकारों में दो लाख से ऊपर हिंदू-मुस्लिम दंगे हो चुके हों, मगर इस सरकार में पिछले चार साल में न ऐसा हुआ है और न आगे ऐसा होगा, क्योंकि मोदीजी सभी को साथ लेकर चलनेवालों में हैं। आनेवाला दौर भाजपा सरकार का दौर है और वर्षों तक कांग्रेस को अपने भ्रष्टाचार का खमियाजा तो भुगतना ही होगा।

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