740 सीढ़ियां चढ़कर 800 फुट ऊंचे पर्वत पर होते हैं शारदा माता के दर्शन आज भरेगा रियासतकालीन तड़का वध का मेला

दुर्गेश रजक

नौगांव। लगभग 800 फीट ऊंचे विशाल पर्वत शिखर पर मां शारदा विराजमान है उनके दर्शन करने के लिए ग्राम गर्रौली से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर 800 फीट ऊंचे पहाड़ पर 740 सीढ़ियां चढ़कर मां शारदा के दर्शन के लिए जाना पड़ता है।
800 फीट ऊंचे पहाड़ से नीचे देखने पर प्राकृतिक नजारा बहुत ही मनमोहक लगता है। इसके अलावा प्राकृतिक नजारों में चार चांद लगा देता है धसान नदी के दोनों ओर का दृश्य। जहां दूर-दूर तक नदी का पानी दिखाई देता है। इतनी ऊंचाई होने के बावजूद पहाड़ पर स्थित कुंड में गर्मियों के अलावा पानी बना रहता है।
राजा रविंद्र सिंह के पूर्वजों ने बनवाया था मंदिर
गर्रौली रियासत के दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव को सनद के अनुसार 1812 में अंग्रेजों द्वारा गरौली रियासत मिली थी। दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव 1812 में पन्ना से गर्रौली आए और अंग्रेजो द्वारा विरासत के रूप में 18 गांव पुतरया, पचवारा कुलवारा, करतोल, गंज, करारा, रानीपुरा, भढ़ियापुरा, गर्रौली, सालट, बलचोर, भटेरा, अमानपुरा, रिछारा, सिलारपुर सतोरा, पड़रिया कनेरा मिले थे। 1812 में 18 गांव की रियासत मिलने के बाद दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव और उनके पुत्र पारीछत मैहर से मां शारदाजी को लाकर गरौली के पहाड़ जिसकी ऊंचाई लगभग 800 फीट है, पर मां शारदा जी की स्थापना के साथ मंदिर निर्माण कराया था।
चैत्र माह के नवरात्रि के दशमी तिथि पर लगता है मेला
रियासत काल में यह मेला पूरे एक माह तक लगता था अब केवल 1 दिन चैत्र माह की नवरात्रि में दसवीं के दिन ताड़का वध के रूप में लगता है। मेला ताड़का वध की प्रथा रियासतकाल से से चली आ रही है।रियासतकाल में यह प्रथा पहेली प्रतियोगिता के रूप में 18 गांव के जमीदार कर जमा करने आते थे। उन जमीदारों के मनोरंजन के साथ प्रतियोगिता के रूप में मनाया जाता था। जो कि इस वर्ष ताड़का वध का 1 दिन का मेला 15 अप्रैल को ताड़का वध का उत्सव हर्षोल्लास के साथ राम, लक्ष्मण और सीता की झांकी के साथ हाथी पर बैठकर मेला स्थल पर पहुंचकर बैंड बाजे और डीजे, पुलिस व्यवस्था के साथ मनाया जाएगा। इसके लिए पिछले कई दिनों से ताड़का का पुतला बनने का काम जारी है। आसपास के एवं क्षेत्र के कई गांव के लोग इस मेला उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इस मेले में आसपास के सभी गांव के घोड़े, हाथी के साथ ताड़का वध लोगों का मनोरंजन करता हैं।

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