रेत माफियाओं की मनमानी पर अंकुश नहीं लगा तो गिर सकता है पुल केन नदी पर अजयगढ़ रोड के पुल के पिलर की रेत निकालकर कर रहे डंप

छतरपुर। चंदला विधानसभा क्षेत्र में रेत माफियाओं की मनमानी इसी तरह चलती रही तो क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन तो बिगड़ेगा ही चंदला-अजयगढ़ रोड पर बना केन नदी का पुल भी कभी भी धराशाई होने की आशंका बनी हुई है। नदी से अवैध तरीके से रेत खनन कर जगह-जगह डंप कर रेत के पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं। रेत के ट्रकों की रेलमपेल से सड़कों का कचूमर निकला जा रहा है। इतना ही नहीं गांवों, कस्बों में आए दिन इन ट्रकों के कारण जाम लगने से क्षेत्र के लोग काफी परेशान हो गए हैं। लेकिन शासन-प्रशासन सब जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।      
क्षेत्र में रेत का खेल इस समय जोरों पर चल रहा है। रेत माफियाओं ने अजयगढ़ मार्ग पुल को गिराने का मन बना लिया है। कुछ महीनों पहले पुल के नीचे रेत भरी हुई थी, लेकिन अब पुल के पिलर की रेत निकालकर पुल को कमजोर कर दिया गया है। पूरे चंदला विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह रेत डम्प हो रही है और रेत माफियाओं द्वारा ट्रक भरे जा रहे हैं। अभी हाल में प्रशासन और पुलिस ने सख्ती दिखाकर एक साथ डेढ़ सौ ट्रक पकड़ लिए थे फिर भी रेत का खेल थमा नहीं है।   
सरवई में आये दिन रेत से भरे ओवरलोड ट्रकों द्वारा जाम लग रहा है। नो एन्ट्री के बाद भी लगातार ओवरलोड ट्रक सैकड़ों की तादाद में निकाले जा रहे है। समाजसेवी विजय वर्मा ने बताया लगातार मेन रोड सरवई बजार में आये दिन जाम लगने से लोगों को निकलने में परेशानी हो रही है। ओवरलोड रेत से भरे ट्रक दिन-रात निकाले जा रहे है, उनपर कोई कार्यवाही नही हो रही। जिससे सरवई से अजीतपुर मार्ग की सिंचाई विभाग की पुलिया चकनाचूर हो गई। ट्रक निकलने से सड़के ध्वस्त हो रही है। सिंगारपुर, विजासिन, मिश्रनपुरवा, ग्रामपंचायत टेड़ीकबरी में लगातार रेत माफियाओं द्वारा रेत का डम्प किया जा रहा है। ताकि आने वाली बरसात में रेत का डबल मुनाफा मिले। किसानों के खेतों में से जबरन गढढा खोदकर रेत निकाली जा रही है और किसानों को धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर इन रेत माफियाओं पर अंकुश नही लगा तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने रेत माफियाओं पर अंकुश लगाया था उनका ट्रांसफर कर दिया गया। ऐसे तहसीलदार का रहना यहां जरूरी है जिन्होने रेतमाफियाओं पर अंकुश लगाया था जिससे माफियाओं में हड़कम्प मच गया था। दिनेश शर्मा ने बताया हमारा क्षेत्र खनिज सम्पदा से भरा हुआ है लेकिन रेत माफिया जबरन नदियों का सीना चीर कर प्रकृति का संतुलन बिगाड रहे है।
कुम्हेड़ और उर्मिल का वजूद खतरे में
माफिया रेत का अवैध उत्खनन कर महाराजपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रो से निकली उर्मिल और कुम्हेड नदी के अस्तित्व को समाप्त कर रहे है। रेत के खेल में पुलिस से लेकर राजस्व अधिकारियो का कमीशन फिक्स है, पद और कद के हिसाब से हर जेब में पैसा पहुँच रहा है। सत्ताधारी दल के नेता खामोश और विपक्षी दल के नेता गहरी नींद के आगोश में है। सूंडा, खिरी, मझगंवा, ढिगपुरा मोजा के मडियन घाट से जेसीबी और ट्रैक्टरों के सहारे रेत निकाली जा रही है। इन घाटों पर सैकड़ो ट्रक डम्प रेत पड़ी है, जिसे रात के अँधेरे में बेचने के लिये भेज दिया जाता है।

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