महाबली छत्रसाल के नाट्य मंचन से दर्शक रोमांचित

छतरपुर। बुन्देल केसरी महाराजा छत्रसाल की जयंती की पूर्व संध्या पर ऑडिटोरियम में नाटक महाबली छत्रसाल का मंचन इप्टा के कलाकारों द्वारा किया गया। बुन्देलखण्ड केसरी महाराजा छत्रासल स्मारक लोकन्यास द्वारा आयोजित इस नाटक को देखने बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं दर्शक उपस्थित हुए। महाराजा छत्रसाल के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता हुआ गीत-संगीत से भरपूर यह नाटक अब तक दिल्ली, जबलपुर, ओरछा, दमोह, खजुराहो सहित अन्य मंचों पर खेला जा चुका है। ऑडिटोरियम में इसकी 10वीं प्रस्तुति शनिवार को हुई। लगभग 35 कलाकारों से सजा यह भव्य नाटक सवा घंटे में दर्शकों को रोमांचित कर गया।
नाटक के अधिकतर संवाद बुन्देली भाषा में थे जिसने नाटक में जान डाल दी। छत्रसाल के दरबार में महाबली तेली द्वारा जब उन्हें पिता की धरोहर सौंपी गई तब महाराजा छत्रसाल ने उनकी तुलना महाराणा प्रताप के सहयोगी भामाशाह से करते हुए उन्हें बुन्देलखण्ड के भामाशाह की संज्ञा दी। इस संवाद पर दर्शकों ने भरपूर तालियां बजाईं। इसके अलावा सौ दण्डी एक बुन्देलखण्डी सहित अन्य संवादों पर भी दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।
इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक में बाल छत्रसाल की भूमिका जयादित्य प्रताप सिंह ने निभाई तो वहीं युवा छत्रसाल की भूमिका में अंकुर यादव ने भरपूर तालियां बटोरीं। अन्य कलाकारों में वीरेन्द्र खरे अकेला, उपासना तोमर, आशीष खरे, राहुल नामदेव, देवेन्द्र कुशवाहा, प्रांजल पटैरिया, अभिदीप सुहाने, नवदीप पाटकार, सौरभ सोनी, कल्पना भास्कर, कविता राज, गुंजन गोस्वामी, विकास चौबे, संजीव श्रीवास, सुभाष अहिरवार, रवि अहिरवार, मुकेश रजक, रामकृपाल यादव, मानस गुप्ता, सीताराम अहिरवार, नितिन रैकवार, सिद्धार्थ शुक्ला, प्रिंस सिंह परिहार एवं नईम खान रहे।
संगीत पक्ष एवं रूप सज्जा ने किया प्रभावित
नाटक का महत्वपूर्ण पहलू उसका संगीत पक्ष भी था। इसके ज्यादातर गीत बुन्देली भाषा में थे वहीं शीर्षक गीत काफी जोशपूर्ण था जिसे मुख्य गायक खनिजदेव चौहान ने अपनी गायिकी से और भी जानदार बना दिया। संगतकारों में अश्विनी दुबे, ऋषि मस्ताना, पीयूष जैन और लखन अहिरवार रहे। वहीं रूप सज्जा की जिम्मेदारी अनिरूद्ध मिस्त्री ने निभाई। मंचीय सज्जा में दिनेश शर्मा और राजेश खरे संजू ने सहयोग किया। नाटक का लेखन शिवेन्द्र शुक्ला एवं नीरज खरे द्वारा किया गया। परिकल्पना, गीत एवं निर्देशन शिवेन्द्र शुक्ला का रहा।
नाटक के प्रारंभ में ट्रस्ट के सचिव सुरेन्द्र शर्मा शिरीष ने ट्रस्ट की भूमिका और महाराजा छत्रसाल के बारे में किए जा रहे कार्यों को दर्शकों के समक्ष रखा। इस दौरान कलेक्टर रमेश भण्डारी, एसपी विनीत खन्ना, ट्रस्ट अध्यक्ष हरिप्रकाश खरे दद्दे, उपाध्यक्ष प्रभा दुबे, सहसचिव राकेश शुक्ल, कोषाध्यक्ष गोकुल गुप्ता सहित राकेश तिवारी, पंकज पहारिया, प्रवीण गुप्त, मोहम्मद करीम, श्याम अग्रवाल, सुरेन्द्र अग्रवाल, हरि अग्रवाल, रविन्द्र अरजरिया, कमल अग्रवाल, सीके शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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