बक्सवाहा ब्लॉक के एक तिहाई स्कूलों में मास्टर ही नहीं स्कूल भवनों में बिजली नहीं, शौचालयों और सफाई में बदइंतजामी

बक्स्वाहा। बक्स्वाहा ब्लॉक में शासन ने स्कूल भवन तो बनवा दिए लेकिन उनमे मूलभूत सुविधाएं और शिक्षकों की भारी कमी है। ब्लॉक के करीब एक तिहाई स्कूलों में शिक्षक न होने से अतिथियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना सपना लगता है।
ब्लॉक के एक तिहाई स्कूल शिक्षकविहीन हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर क्या होगा। यह बताने की जरूरत नहीं है। जिन स्कूलों में एक शिक्षक मौजूद है उसे प्राईमरी और मिडिल सेक्शन की तमाम कागजी खानापूर्ति करनी पड़ती है ऐसे में वह अध्यापन कार्य हेतु कितना समय दे पाता होगा और कितनी कक्षाएं चला सकता है यह भी सोचने की बात है। प्रशासनिक योजनाओं की खानापूर्ति ही इतनी है कि एक शिक्षक अपने पूरे स्कूल समय में वह नहीं कर पाता फिर अध्यापन कार्य तो बहुत दूर की बात है।
बक्स्वाहा ब्लॉक में109 प्राइमरी, 61 मिडिल और 7 हाईस्कूल स्कूल हैं। 61 मिडिल स्कूल में से 21 में शिक्षक ही नहीं है। ये केवल अतिथियों के भरोसे चल रहे हैं। 22 स्कूलों में मात्र 1 शिक्षक ही है। उसी शिक्षक को प्रशासनिक काम भी करना है और पढ़ाना भी है। जिससे पढ़ाई की औपचारिकता भर पूरी हो रही है। 12 मिडिल स्कूलों में जरूर 2 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। 5 दर्जन मिडिल स्कूलों में से मात्र 6 स्कूल ही ऐसे हैं जहां 3 शिक्षक तैनात है और ये भी वे स्कूल हैं जहां अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का आना-जाना ज्यादा होता है।
7 हाई स्कूलों में 3 हाईस्कूल खोले तो गए परंतु उन्हें शिक्षक आज तक उपलब्ध नहीं हो सके। जिनमें मुख्य रुप से गड़ोही, पड़रिया और सैडारा स्कूल आते हैं। मझगुवां घाटी के हाई स्कूल में केवल एक शिक्षक ही पदस्थ है। बाकी सुनवाहा, मड़देवरा और निवार में भी पर्याप्त शिक्षकों की मौजूदगी नहीं है।
61 मिडिल स्कूल में 17 स्कूलों में बिजली कनेक्शन है 44 स्कूलों में आज बिजली नहीं है पंखा जैसी बाते करना तो बेमानी है। एक ओर स्वच्छ भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर आम आदमी तक इस मुहिम में जुड़ा हुआ है वही दूसरी ओर बच्चों को खुले में शौच जाने की मजबूरी बनी हुई है। 61 स्कूलों में से 46 में  शौचालय है। 15 में क्षतिग्रस्त है जिससे बच्चों को खुले में जाना पड़ता है। 61 मिडिल स्कूलों मे से 56 में भवन है और 4 स्कूलों में निर्माण का काम चल रहा है। वही तेरियामार स्कूल का भवन क्षतिग्रस्त हो गया है।
इनका कहना है-
मेरे द्वारा जानकारी जिला भेज दी गई है। जैसे ही शासन से मुझे आदेश मिलेगा में सुविधाओं पर काम करूंगा।
-राम गोपाल प्रजापति, बीआरसी

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