एक लाख 15 हजार का बिजली बिल निरस्त करने का आदेश

छतरपुर। उपभोक्ता फोरम ने एक मामले में आदेश पारित करते हुए बिजली विभाग को 1 लाख 15 हजार 184 रुपए का बिल निरस्त करने के आदेश के साथ ही 2 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय अदा करने का आदेश पारित किया है।
एडवोकेट वशिष्ठ नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि धर्मपाल सिंह पुत्र जय सिंह (75) रिटायर्ड आरक्षक निवासी कमला कॉलोनी, छतरपुर को मध्य प्रदेश पुलिस में छतरपुर में पदस्थापना के समय से बिजावर नाका, सागर रोड छतरपुर स्थित शासकीय आवास क्रमांक 3 आवंटित किया गया था। जिसमें उन्होंने बिजली विभाग से घरेलू कनेक्शन प्राप्त किया और उस कनेक्शन पर विभाग द्वारा जारी बिलों का भुगतान करता रहा। वर्ष 1995 तक उन पर बिल की कोई राशि बकाया नहीं थी। वर्ष 1995 में उसका स्थानांतरण हो जाने से उसने आवास 3 अगस्त 1995 को खाली कर उसकी सूचना नगर निरीक्षक कोतवाली छतरपुर को दी और उसी दिन विद्युत वितरण कंपनी के प्रभारी अधिकारी को कनेक्शन काटने हेतु पत्र दिया। इसके पश्चात 9अगस्त 1995 को उसने पुनः पुलिस अधीक्षक को आवास रिक्त किए जाने पर पत्र प्रेषित किया। इसके बाद उक्त शासकीय आवास लक्ष्मी प्रसाद विश्वकर्मा आरक्षक छतरपुर को आवंटित कर दिया गया। इसका उपयोग और उपभोग लक्ष्मी प्रसाद करता रहा किंतु उसके आवेदन देने के बावजूद बिजली विभाग ने उसके नाम पर कनेक्शन न काट कर चालू रखा। 8 दिसंबर 2008 को उसने पुनःविद्युत वितरण कंपनी को कनेक्शन काटने हेतु आवेदन दिया और इस संबंध में 24 दिसंबर 2008 को पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित किया। किंतु उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके द्वारा लक्ष्मी प्रसाद को कहे जाने पर उसने भरोसा दिया कि वह बिल जमा करता रहेगा। वह अपने नाम से ही कनेक्शन लिए हुए हैं।26 दिसंबर 2017 को उसे बिजली विभाग से आवास में बिल की राशि 1 लाख 15 हजार 184 रुपए बकाया होने की जानकारी प्राप्त हुई। तब आवेदक ने वकील के माध्यम से 30 दिसंबर 2017 को विद्युत वितरण कंपनी और लक्ष्मी प्रसाद को नोटिस भेजा किंतु लक्ष्मी प्रसाद ने नोटिस लेने से इंकार कर दिया और विद्युत वितरण कंपनी से बात करने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। कंपनी के द्वारा आवेदन प्राप्त करने के बावजूद कनेक्शन न काट कर उसे जमा सुरक्षा निधि वापस नहीं की गई और उससे  राशि वसूलने हेतु नोटिस दिया गया। जिससे उसने उपभोक्ता फोरम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। इसमें आवेदक के अधिवक्ता रामकुमार अवस्थी ने अपने अतर्क रखे। फोरम के अध्यक्ष श्रीराम दिनकर, सदस्य संजय शर्मा एवं सदस्य निशा गुप्ता ने मामले का अवलोकन कर पाया कि परिवादी पर विद्युत कनेक्शन के बिलों की कोई राशि बकाया नहीं है। इतना ही नहीं विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा परिवादी के प्रति सेवा में कमी की गई है। जिससे विद्युत कंपनी के द्वारा परिवादी को भेजे गए 1 लाख 15 हजार 184 रुपए के बिल को निरस्त कर दिया। साथ ही परिवादी को मानसिक क्षति व परिवाद व्यय के रूप में 2000 रुपए अदा करने का आदेश भी पारित किया गया।

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