अल्पविराम का प्रशिक्षण लेने मंगलग्राम सहयोगी पंचगनी रवाना

छतरपुर। जिले के 8 मंगलग्रामों से 40 सहयोगियों को लेकर आनंदम् सहयोगी प्रदीप सेन एवं चन्द्रभान रावत बुधवार सुबह विशेष बस द्वारा पंचगनी रवाना हो गए। महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित पंचगनी के अंतर्राष्ट्रीय नैतिक पुनुरुत्थान संस्थान में मंगलग्राम सहयोगी 5 दिनों तक अल्पविराम का  प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे एवं अल्पविराम से बदले गांवों का भ्रमण करेंगे।
सागर कमिश्नर मनोहर दुबे के प्रयासों से पूरे मप्र में छतरपुर एक ऐसा जिला हो गया है जहां मंगलग्राम की अवधारणा अब मूर्तरूप ले रही है। श्री दुबे का मानना है कि यदि व्यक्ति सुविधा के स्थान पर अंर्तमन की आवाज सुनकर निर्णय लेगा तो समाज में असंतोष कम होगा और आनंद बढ़ेगा। अल्पविराम अंर्तमन की आवाज सुनने का कारगर साधन सिद्ध हुआ है। पंचगनी में देश की केन्द्र एवं राज्य सरकारें अपने अधिकारियों को प्रशिक्षण प्राप्त करने नियमित रूप से भेजती हैं। मप्र सरकार भी अपने सभी प्रक्षिशु डिप्टी कलेक्टर्स को पंचगनी प्रशिक्षण लेने भेजती है। मात्र टाटा स्टील ही अपनी ग्रामीण विकास सेवाओं के अंतर्गत अशासकीय व्यक्तियों को यहां प्रशिक्षण हेतु भेजती है। छतरपुर जिला एक उदाहरण बन गया है जिसने बिना किसी सरकारी मदद के 40 मंगलग्राम सहयोगियों को प्रशिक्षण के लिए पंचगनी भेजा है।
मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी द्वारा मंगलग्राम के इन लोगों को अल्पविराम का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ग्राम पंचायत देरी, ललौनी, पठापुर, सौंरा, गौरगांय, सरानी, बंधीकला एवं बगौता से मंगलग्राम सहयोगी पंचगनी गए हैं। उनके आवागमन एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था समाजसेवियों के सहयोग से की गई है।

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